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योरोप के सिद्धहस्त लेखक अर्नोल्ड बेनेट की यह मूल अंग्रेजी पुस्तक How to Live on 24 Hours a Day एक सदी बाद भी पुरे दुनिया भर में लोकप्रिय पुस्तकों की श्रेणी में आती है, आज की दुनिया में इस पुस्तक की बहुत प्रासंगिकता है। हालाँकि इस एक सदी में संसार बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन न तो मानव स्वभाव बदला है, न ही यह सच्चाई बदली है कि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं। इस पुस्तक का प्रामाणिक अनुवाद आपके सामने प्रस्तुत है। ताकि आप भी उसका लाभ उठा सके।
इस पुस्तक में लेखक ने योरोप में औद्योगिक क्रांति के आगमन के बाद से जमा हुए सफेदपोश श्रमिकों की बड़ी और बढ़ती संख्या को संबोधित किया। उनके विचार में, यह कार्य कुशल व्यक्ति, अपने दिन के आठ घंटे, सप्ताह में 40 घंटे, उन नौकरियों में लगाते हैं, जिन्हें वे पसंद नहीं करते थे, और अपने मौजूदा कार्य से ज्यादा नफरत करते थे। उन्होंने केवल अपने जीविकोपार्जन के लिए काम करना स्वीकार किया, लेकिन उनके दैनिक अस्तित्व में जागना, काम के लिए तैयार होना, कार्य दिवस के दौरान जितना संभव हो उतना कम काम करना, घर जाना, आराम करना, सो जाना और अगले दिन प्रक्रिया को दोहराना शामिल था। संक्षेप में, उन्हें विश्वास नहीं था कि वे वास्तव में जी रहे थे।
श्रीमान अर्नोल्ड बेनेट ने इन "वेतनभोगियों" से अपने अतिरिक्त समय को पहचानकर उन्हें सुवर्ण क्षणों में परिवर्तित कर खुद को बेहतर बनाने के लिए इसका अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह करते हुए इस समस्या का समाधान किया। दिन की शुरुआत में, जल्दी उठकर, और काम के गंतव्य स्थान के यातायात सवारी पर, काम से घर के रास्ते में, शाम के घंटों में और विशेष रूप से सप्ताहांत के दौरान अतिरिक्त समय पाया जा सकता है, यह बताया है। इस समय के दौरान, उन्होंने महान साहित्य पढ़ने, कला में रुचि लेने, जीवन पर चिंतन करने और आत्म-अनुशासन सीखने जैसे