Nehodí se? Vůbec nevadí! Zboží můžete vrátit až do 30 dní
S dárkovým poukazem nešlápnete vedle. Obdarovaný si za dárkový poukaz může vybrat cokoliv z naší nabídky.
Až 30 dní na vrácení zboží
प्राचीन लोकमान्यता के अनुसार 'शबर ऋषि' द्वारा प्रणीत सभी मंत्र 'शाबर मंत्र' कहलाते हैं। शबर ऋषि किस काल में हुए? शाबर मंत्रों का प्रचलन कब (किस काल) से प्रारंभ हुआ यह बताना मुश्किल है।
इन मंत्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें संस्कृत के ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। शाबर मंत्र में विनियोग, न्याय छंद ऋषि वगैरह नहीं होते। इन मंत्रों में व्यक्ति की इष्ट साधना व गुरु की शक्ति प्रधान होती है। गुरु की कृपा एवं गुरु मुख से ग्रहित किए बिना शाबर मंत्र सिद्ध नहीं होते। शाबर मंत्रों में साधक को स्वयं की साधना भक्ति पर स्वाभिमान विशेष होता है। जिसको साधक गुरु की शक्ति के साथ जोड़ देता है, तथा गुरु कृपा का सहारा पग-पग पर लेता है।
पं. रमेश द्विवेदी संस्कृत के महान पंडित एवं वास्तु मार्तंड हैं। इनकी प्रतिभा और ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। विविध विषयों के धनी पं. रमेश द्विवेदी संस्कृत-साहित्य से एम.ए. करने के पश्चात् पुस्तक लेखन के क्षेत्र में कदम रखे, जिसके फलस्वरूप अनेक दुर्लभ-दुष्प्राप्य पांडुलिपियां आज पुस्तक के रूप में सामान्य पाठकों के लिए प्रकाशित हो रही हैं।