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जिंदगी में चार प्रकार के कार्य किए जाते हैं। अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण, अत्यावश्यक किन्तु महत्वपूर्ण नहीं, अत्यावश्यक नहीं किन्तु महत्वपूर्ण, न ही आवश्यक और न ही महत्वपूर्ण, अपने कार्यों का वर्गीकरण कर उनका समय प्रबंध्न किया जाए तो हर कार्य समय पर किया जा सकता है। बीता समय कभी नहीं आता, समय बहुत बलवान है, जो लोग समय की परवाह करना नहीं जानते समय उनकी परवाह नहीं करता। ऐसे ना जाने कितने जुमले हम जानते हुए भी समय को बेकार करते हैं और कुछ समय बाद समय हमें बेकार कर देता है। अगर आप समय की कैंची अपनी जिंदगी पर चलने नहीं देना चाहते हैं तो पढि़ए रेखा व्यास द्वारा लिखी यह पुस्तक उदयपुर ;राजस्थानद्ध में जन्मी डा.. रेखा व्यास का रुझान बचपन से ही लेखन कार्य की तरपफ रहा। उन्होंने अपना पहला व्यंग्य 'जूते की आत्मकथा' तब लिखा जब वह तीसरी कक्षा में थीं। जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में पी.एच.डी. की उपाध् िप्राप्त करने के साथ वे विभिन्न संचार माध्यमों के लिए कार्यक्रम निर्माण में भी कार्यरत हैं।
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